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Vaccine के लिए भारत को कच्चे माल की आपूर्ति करेगा अमेरिका

न्यूयॉर्क, 26 अप्रैल (इंडस प्रिज्म)। भारत में कोरोनावायरस महामारी का प्रकोप इन दिनों सर चढ़कर बोल रहा है। ऐसे में तमाम देश भारत की मदद करने के लिए आगे आ रहे हैं। रही बात अमेरिका की, तो यहां के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवन ने कहा है कि कोविशील्ड बनाने के लिए जरूरी सभी कच्चे माल और अन्य उत्पादों की आपूर्ति भारत को जल्द से जल्द कराए जाने के लिए अमेरिका में दिन-रात काम जारी है।

पिछले साल ट्रंप प्रशासन के दौरान जब अमेरिका में कोरोना के प्रकोप का बोलबाला था, तब भारत ने अमेरिका की मदद की थी। इस बात को याद करते हुए जेक ने भारत के राष्ट्रीय सलाहकार अजीत डोभाल संग रविवार को फोन पर हुई बातचीत के दौरान कहा, अमेरिका उपलब्ध संसाधनों की आपूर्ति कराए जाने की दिशा में निरंतर काम कर रहा है। जेक की प्रवक्ता एमिली हॉर्ने ने इसकी जानकारी दी।

एमिली ने इस बातचीत के बारे में एक ब्यौरा देते हुए कहा कि सुलिवन ने डोभाल को बताया है कि वॉशिंगटन तत्काल आधार पर ऑक्सीजन सहित अन्य जरूरी चीजों की आपूर्ति कराए जाने के अन्य विकल्पों को भी तलाश रहा है।

अमेरिका द्वारा भारत को टेस्टिंग किट, वेंटिलेटर्स, दवाइयों और फ्रंटलाइन वर्कर्स द्वारा उपयोग में लाई जाने वाली अन्य व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरणों की भी आपूर्ति कराई जाएगी।

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लागू किए गए राष्ट्रीय रक्षा उत्पादन अधिनियम के तहत वैक्सीन बनाए जाने के लिए कच्चे माल और कोविड से संबंधित अन्य उत्पादों के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया गया था, जिसे बाइडन के प्रशासन में भी जारी रखा गया।

भारत में वैक्सीन बनाने वाली कंपनी सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के सीईओ आदर पूनावाला और अन्य भारतीयों द्वारा अनुरोध किए जाने के करीब दो हफ्ते बाद भारत के लिए वैक्सीन संबंधी कच्चे मालों की आपूर्ति कराए जाने को लेकर इस निषेधाज्ञा को हटाए जाने का फैसला लिया गया।

हालांकि हाल ही में यानि कि शुक्रवार को अमेरिकी सरकार के विभिन्न प्रवक्ताओं ने यह स्पष्ट नहीं किया कि क्या बाइडन प्रशासन द्वारा इस प्रतिबंध को हटाया जाएगा भी नहीं।

अमेरिका के स्टेट डिपार्टमेंट के प्रवक्ता नेड प्राइस ने गुरुवार को कहा कि टीकाकरण के मामले में अमेरिकी वासियों को पहले प्राथमिकता दी जाएगी। यह न सिर्फ अमेरिकी हित में है, बल्कि पूरी दुनिया के हित में है।

लेकिन जैसे-जैसे बाकी देश भारत की मदद के लिए आगे आते रहे और अमेरिकी प्रशासन पर भारत की मदद के लिए दबाव बढ़ता रहा, अमेरिकी विदेश मंत्री एंथनी ब्लिंकन ने इस बात का संकेत दिया कि महामारी से लड़ने के लिए अमेरिका की तरफ से भारत की मदद की जाएगी।

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