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असम, राहुल गांधी ने कहा- ‘हम दो हमारे दो, अच्छी तरह सुन लो- कभी नहीं होगा CAA लागू’

शिवसागर (असम) : भाजपाऔर आरएसएस पर असम को विभाजित करने का आरोप लगाते हुए कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने रविवार को कहा कि उनकी पार्टी असम समझौते के हर सिद्धांत की रक्षा करेगी और अगर राज्य में सत्ता में आती है तो कभी भी संशोधित नागरिकता कानून लागू नहीं करेगी।

असम में चुनावी बिगुल फूंकते हुए राहुल गांधी ने मोदी सरकार पर बार-बार प्रहार किया और उस पर ‘हम दो, हमारे दो’ की सोच के साथ काम करने का आरोप लगाया। इस नारे का इस्तेमाल हाल ही में उन्होंने लोकसभा में यह बताने के लिये किया था कि देश को चार लोग मिलकर चला रहे हैं।

असम में इस साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले अपनी पहली जनसभा में मंच पर गांधी और पार्टी के अन्य नेता ‘गमछा’ पहने हुए थे, जिसपर सांकेतिक रूप से ‘सीएए’ शब्द को काटते हुए दिखाया गया, जो विवादास्पद कानून के खिलाफ एक संदेश था। गांधी ने हाल में गुजर गये असम के पूर्व मुख्यमंत्री तरूण गोगोई के योगदान की बहुत प्रशंसा की।

उन्होंने कहा कि वह ऐसे सिपाही थे जिन्होंने राज्य को एकजुट किया और उसकी रक्षा में अपना पूरा जीवन खपा दिया। बिना किसी का नाम लिये गांधी ने प्रधानमंत्री के पूर्व प्रधान सचिव नृपेंद्र मिश्रा को पद्म भूषण दिये जाने का परोक्ष रूप से जिक्र करते हुए कहा, ‘‘इसी पुरस्कार सूची, जिसमें तरूण गोगोई थे, उसमें पीएमओ के एक नौकरशाह का भी नाम था और मुझे बड़ी निराशा हुई कि भारत सरकार ने तरूण गोगोई और इस राज्य का अपमान किया।

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने कहा, ‘‘ एकतरफ तो एक ऐसा व्यक्ति है जिसने लोगों के वास्ते अपना जीवन लगा दिया, असम को एकजुट किया और भारत के झंडे की रक्षा की, जबकि दूसरी तरफ पीएमओ का एक नौकरशाह है जिसने बस प्रधानमंत्री की तारीफ की। तरुण गोगोई मेरे गुरु थे और मुझे अच्छा नहीं लगा।”

असम समझौते के महत्व पर बल देते हुए गांधी ने कहा कि यह एक तरह से असम का रक्षक और ‘शांति का उपकरण’ है। उन्होंने कहा, ‘‘मैं आपको बताना चाहता हूं कि मैं और मेरी पार्टी के कार्यकर्ता समझौते के सिद्धांतों की रक्षा करेंगे। हम इससे एक इंच भी पीछे नहीं हटेंगे।”

गांधी ने कहा कि असम में अवैध आव्रजन एक मुद्दा है और विश्वास जताया कि राज्य के लोगों में वार्ता के माध्यम से मुद्दे के समाधान की क्षमता है। असम समझौते के मुद्दे पर भाजपा और आरएसएस पर राज्य को विभाजित करने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा, ‘‘अगर असम बंटता है तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी या आपके मुख्यमंत्री (सर्बानंद सोनोवाल) पर प्रभाव नहीं पड़ेगा, बल्कि असम के लोग और शेष भारत को नुकसान होगा।”

इस राज्य के महत्व पर बल देते हुए पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि यह भारत के गुलदस्ते में सुंदर फूल है। उन्होंने यहां बोर्डिंग फील्ड मैदान में जनसभा में कहा, ‘‘ कभी यह मत भूलिए कि जितना आपको देश की जरूरत है, उतना ही देश को आपकी जरूरत है। ” उन्होंने कहा कि यदि असम में हिंसा होती है और यह बंटता है तो देश के साथ राज्य को भी नुकसान पहुंचेगा और ‘‘ हम ऐसा होने नहीं देंगे।”

गांधी ने कहा, ‘‘ हमने यह गमछा पहन रखा है जिसपर सीएए लिखा है और उसे काट दिया गया है । इसका अर्थ है कि कुछ भी हो जाए लेकिन सीएए को (हमारे द्वारा) लागू नहीं होने दिया जाएगा। ‘हम दो हमारे दो’ सुन लीजिए, हम सीएए (लागू) नहीं होने देंगे।”

उन्होंने कहा, ‘‘ मैं आपको बताने आया हूं कि कांग्रेस के सभी नेता यहां इसिलए खड़े हैं कि दुनिया की कोई भी ताकत असम को तोड़ नहीं सकती। कांग्रेस और असम के लोग उन लोगों को सबक सिखाएंगे, जो असम समझौते को छूने और नफरत फैलाने का प्रयास करेंगे।”

असम समझौते में अवैध आव्रजकों की पहचान करके उन्हें वापस भेजने का प्रावधान है, जो 1971 के बाद राज्य में आये, भले ही उनका धर्म कोई भी हो। सीएए के तहत धार्मिक उत्पीड़न की वजह से 31 दिसंबर, 2014 के बाद पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आये हिंदुओं, सिखों, बौद्धों, जैनियों, पारसियों और ईसाइयों को अवैध आव्रजक नहीं समझा जाएगा और उन्हें भारतीय नागरिकता दी जाएगी।

राज्य में सीएए विरोधियों का कहना है कि यह कानून असम समझौते के प्रावधानों का उल्लंघन करता है। अपने संबोधन में गांधी ने कहा कि राज्य को ‘‘अपने मुख्यमंत्री” की जरूरत है जो लोगों की आवाज सुने, न कि एक ऐसा मुख्यमंत्री जो नागपुर और दिल्ली की आवाज सुने। उन्होंने कहा, ‘‘रिमोट कंट्रोल एक टीवी चला सकता है, लेकिन मुख्यमंत्री को नहीं। वर्तमान मुख्यमंत्री नागपुर और दिल्ली की बात सुनते हैं। अगर असम को फिर से इस तरह का मुख्यमंत्री मिलता है, तो इससे लोगों को कोई फायदा नहीं होगा। युवाओं को एक ऐसे मुख्यमंत्री की जरूरत है, जो उन्हें नौकरी दे।”

परिवार नियोजन का एक पुराना नारा इस्तेमाल करते हुए मोदी सरकार और राज्य सरकार पर गांधी ने निशाना साधा और आरोप लगाया कि भारत को चार लोगों ‘‘हम दो, हमारे दो, बाकी सबमार लो’ द्वारा चलाया जा रहा है उन्होंने कहा, ‘ मैंने असम के लिए एक नया नारा तैयार किया है – हम दो, हमारे दो; असम के लिये हमारे और दो, जो असम को चला रहे हैं। और असम से सबकुछ लो’ यह हकीकत है। ”

उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में प्राकृतिक संसाधनों और पीएसयू को देश के दो बड़े उद्योगपतियों के हाथों ‘‘बेचा” जा रहा है। गांधी ने मोदी सरकार पर कोविड-19 महामारी के दौरान सार्वजनिक धन की ‘‘लूट” करने और ‘‘दो बड़े व्यवसायी दोस्तों” के ऋण माफ करने का भी आरोप लगाया। संबोधन के दौरान उन्होंने यह दर्शाने के लिए हाथ में 167 रुपये लेकर लोगों को दिखाया कि चाय श्रमिकों को बस इतनी राशि मिलती है जबकि ‘‘गुजरात के व्यापारी लोग चाय बागान पा जाते हैं।”

उन्होंने कहा, ‘‘ यही वजह है कि वे (भाजपा वाले) असम को बांटना चाहते हैं, क्योंकि उन्हें मालूम है कि यदि असम से चोरी करनी है तो राज्य को बांटना होगा।” गांधी ने कहा कि कांग्रेस उसमें 200 रूपये जोड़ेगी और चाय श्रमिकों को 365 रूपये की दिहाड़ी देगी। उन्होंने कहा, ‘‘ आप पूछेंगे कि अतिरिक्त पैसा आएगा कहां से, मैं आपको बताऊं कि यह गुजराती व्यापारियों से आएगा।”

तीन कृषि कानूनों पर किसान आंदोलन पर उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री ने पिछले सप्ताह लोकसभा में भाषण दिया लेकिन किसानों के बारे में कुछ नहीं किया और बजट में भी उनके लिए कुछ नहीं है।

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